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मुद्रा स्वतंत्रता के विषय में

इतिहास स्वयं को दोहराता नहीं है लेकिन प्रभाव छोड़ जाता है।

जब मानव परिघटन में यह स्पष्ट हो जाता है कि नियंत्रण और शक्ति का सार्वभौमिक स्रोत एक ही है, तब इन शक्तियों से अलगाव और विच्छेदन उत्तरजीविता और निर्वहन का विषय बन जाती हैं। छापेखानों के आविष्कार और अस्तित्व में आने के बाद से ही पूरी मानव सभ्यता धीरे धीरे प्रभुत्व सम्पन्न वर्ग के प्रभाव में आ गई है जिनके पास मुद्रा नियंत्रण और हेर फेर द्वारा व्यय कार्य के मूल्यांकन की क्षमता है। यही प्रभुतासम्पन्न वर्ग अपने नियंत्रक सामर्थ्य का प्रयोग कर प्रत्यक्ष मूल्यवंछित पारिश्रमिक का अपनी प्रतिनिधि मुद्रा से मूल्यांकन कर जनता के विनिमय को प्रभावित कर रहे।

मनुष्य, यंत्र तथा प्रकृति द्वारा ऊर्जा की खपत ही मूल्य म आत्मिक स्रोत है। इन स्रोतों तथा इनके परिणामों का सोची समझी मुद्रास्फीति द्वारा अवमूल्यन कर दिया गया है। वैश्विक आबादी द्वारा मुद्रा को परिश्रमिक के अर्थ में लिया जाता था परंतु आज इनका अर्थ कुछ प्रभावशाली तथा अनुत्तरदायी संगठनों की मनमानी गणित बन कर रह गया है। मानव जाति इस आदेशित प्रभुता से प्रभावित होकर साध्य बचाव ढूंढ रही है।

जब क्षमतावान तत्वों के पास कागज़ी तौर पर धोखाधड़ी तथा मिलीभगत से कृत्रिम मूल्यनिर्माण की ताकत आ जाती है तो ये मामले उनके लिए मामूली हो जाते हैं। जिनके पास ये शक्तियां हैं वे अपने धनोपयोग से खुद को न्यायिक रूप से स्वतः ही सुरक्षित कर लेते हैं। परिणामस्वरूप राजनीतिक औचितयों के मनमाने गणित से श्रम का अवमूल्यन होता जा रहा है। इन परिस्थितियों के फलस्वरूप सभी भिन्न समाजों में  मूल्य की अखंडता लाक्षणिक रूप से तथा पूरी तरह से समाप्ति के कगार पर ला दी गई है।

ऊर्जा व्यय द्वारा साध्य तथा प्रामाणिक बचाव के रूप में बिटकॉइन तथा इसके यौगिक क्रिप्टो एसेट्स   सामने आये हैं।

क्रिप्टो एसेट्स  के प्रसारण से पूर्व राष्ट्र का मुद्रापुर्ति पर नियंत्रण त्यागना कभी भी एक साध्य संभावना  नहीं थी क्योंकि इससे धोखाधड़ी तथा मुद्रा के अवमूल्यन का ख़तरा था। सिर्फ राष्ट्र और केवल राष्ट्र ही भय और बल के प्रयोग से मुद्रित धन की अखंडता को बचा सकता है। राष्ट्र की स्थिरता के लिए मुद्रा की अखंडता का बचाव आवश्यक है क्योंकि इसीसे विश्वसनीय मूद्रा विनिमय का  के बारे में सोचा जा सकता है।

जबतक न्यायसंगत ढंग से राष्ट्र अपने एकाधिकार को बनाए हुए है तबतक इसके मूद्रा नियंत्रण को बिटकॉइन और इसके यौगिक क्रिप्टो एसेट्स  को लागू करने जैसे विकल्पों द्वारा रोका जा सकता है।

मनुष्य तकनीकी रूप से इतना विकसित हो गया है  कि सिर्फ विद्युत व्यय तथा गणितीय तथ्योँ से मूल्य प्रमाण का तरीका ढूंढ़ लिया।

बिटकॉइन के शुरुआत से पहले ऐसा कोई तरीका विकसित नहीं हुआ था।

जैसे जैसे पिछले दशक में क्रिप्टो मुद्राओं का विस्तार  हुआ और उनकी स्वीकार्यता बढ़ी, वैसे वैसे तकनीकी पसंद लोगों की मानसिकता मूल्य के परिप्रेक्ष्य में बदली है। जिस तरह से इंटरनेट ने लोगों में सूचना के आदान प्रदान का नजरिया बदल दिया वही कार्य क्रिप्टो असेट्स मूल्य विनिमय के साथ कर रहे।

हम राष्ट्र नियंत्रित मूद्रा से स्वतंत्रता की बात नहीं कर रहे बल्कि सत्ताधारियों को समर्पित मूद्रा से स्वतंत्रता के लिए कह रहे।

इसके कई कारण हैं। गैरजिम्मेदार सत्ताधारियों की शक्ति तथा अन्य सामर्थ्य ही विगत शताब्दियों में हुईं कई मौतों और अपराधों का ब्यौरा देती हैं।

मुद्रानिर्माता समझते हैं कि मुद्रापुर्ति पर पूर्ण रूप से उनका नियंत्रण है साथ ही साथ इससे मीडिया और शिक्षा का ह्रास भी समझ से परे है।

वे पब्लिक बैंको को लोन देकर सर्वांगी खतरा उठाने का ढोंग करते हैं तथा इन बैंकों से पूरी पारदर्शिता की उम्मीद भी करते हैं जबकि इनका स्वयं पारदर्शिता से को,ई लेना देना नहीं होता।

उनके व्यवहार से उनकी खुले बाजार में विश्वनीयता खत्म होती जा रही । वे  नई छपी मुद्रा आपुर्ति बाजार हित में न करके अपने हित में करते हैं।

वे कुछ कानून बनाने और चलाने वालों की मदद से ऐसी नीतियां चलवाते हैं जिससे इनकी कारगुजारियां के खुलने का खतरा कम हो तथा तथा परिणाम जनता उठाए जो उन मुद्राओं का प्रयोग करती है।

वे उन्हीं आर्थिक आपदाओं के कारण और समाधान दोनों हैं जिनका बाकी जनता के उत्थान से कोई सरोकार ही नहीं है और जिसका बोझ उनके इस व्यवहार का ही परिणाम है।

यह मूद्रा स्वतंत्रता की घोषणा उन लगातार मूद्रा हेर फेर और हानियों के विरुद्ध जवाब है जिससे उपजा लगतार अवमूल्यन को  जनता झेल रही है।

हम सभी  मिलकर मूल्यों की अखंडता हेतु अपना समर्पण व्यक्त करते हैं तथा मूल्य हनन के लिए प्रयासरत लोगों के प्रति आपत्ति जताते हैं।